UPSC PSIR Optional Syllabus in Hindi: Paper 1 & Paper 2

PSIR वैकल्पिक पाठ्यक्रम — राजनीति विज्ञान एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंध

प्रश्न पत्र 1 एवं प्रश्न पत्र 2 — पूर्ण एवं अद्यतन पाठ्यक्रम (UPSC मुख्य परीक्षा)

राजनीति विज्ञान एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंध (PSIR) यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के सबसे लोकप्रिय वैकल्पिक विषयों में से एक है। इसका पाठ्यक्रम दो प्रश्न पत्रों — प्रश्न पत्र 1 एवं प्रश्न पत्र 2 — में विभाजित है, जिनमें से प्रत्येक 250 अंकों का है (कुल 500 अंक)। नीचे दोनों प्रश्न पत्रों का पूर्ण, अनुभाग-वार (Section-wise) पाठ्यक्रम दिया गया है।

2 प्रश्न पत्र (Paper I एवं Paper II) · प्रत्येक 250 अंक, कुल 500 अंक · प्रश्न पत्र 1: राजनैतिक सिद्धांत एवं भारतीय शासन-राजनीति · प्रश्न पत्र 2: तुलनात्मक राजनीति, अंतर्राष्ट्रीय संबंध एवं भारत की विदेश नीति · प्रत्येक प्रश्न पत्र हिंदी एवं अंग्रेज़ी दोनों माध्यमों में उपलब्ध।

एक नज़र में

PSIR वैकल्पिक पाठ्यक्रम: प्रश्न पत्र 1

खंड-अ: राजनैतिक सिद्धांत एवं भारतीय राजनीति

क्र.विषय
1राजनैतिक सिद्धांत: अर्थ एवं उपागम
2राज्य के सिद्धांत: उदारवादी, नवउदारवादी, मार्क्सवादी, बहुवादी, पश्च-उपनिवेशी एवं नारी-अधिकारवादी
3न्याय: रॉल्स के न्याय के सिद्धांत के विशेष संदर्भ में न्याय का संप्रत्यय एवं इसके समुदायवादी समालोचक
4समानता: सामाजिक, राजनैतिक एवं आर्थिक समानता एवं स्वतंत्रता के बीच संबंध; सकारात्मक कार्य (Affirmative Action)
5अधिकार: अर्थ एवं सिद्धांत, विभिन्न प्रकार के अधिकार; मानवाधिकार की संकल्पना
6लोकतंत्र: क्लासिकी एवं समकालीन सिद्धांत; लोकतंत्र के विभिन्न मॉडल — प्रतिनिधिक, सहभागी एवं विमर्शी
7शक्ति, प्राधान्य (Hegemony), विचारधारा एवं वैधता की संकल्पना
8राजनैतिक विचारधाराएँ: उदारवाद, समाजवाद, मार्क्सवाद, फासीवाद, गांधीवाद एवं नारी-अधिकारवाद
9भारतीय राजनैतिक चिंतन: धर्मशास्त्र, अर्थशास्त्र एवं बौद्ध परंपराएँ; सर सैयद अहमद खान, श्री अरविंद, एम. के. गांधी, बी. आर. अम्बेडकर, एम. एन. रॉय
10पाश्चात्य राजनैतिक चिंतन: प्लेटो, अरस्तु, मैकियावेली, हॉब्स, लॉक, जॉन एस. मिल, मार्क्स, ग्राम्स्की, हाना आरेन्ट

खंड-ब: भारतीय शासन एवं राजनीति

क्र.विषय
1भारतीय राष्ट्रवाद — (क) भारत के स्वाधीनता संग्राम की राजनैतिक कार्यनीतियाँ: संविधानवाद से जन सत्याग्रह, असहयोग, सविनय अवज्ञा एवं भारत छोड़ो, उग्रवादी एवं क्रांतिकारी आंदोलन, किसान एवं कामगार आंदोलन; (ख) भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के परिप्रेक्ष्य: उदारवादी, समाजवादी एवं मार्क्सवादी, उग्र-मानवतावादी एवं दलित
2भारत के संविधान का निर्माण: ब्रिटिश शासन की विरासत; विभिन्न सामाजिक एवं राजनैतिक परिप्रेक्ष्य
3भारत के संविधान की प्रमुख विशेषताएँ: प्रस्तावना, मौलिक अधिकार तथा कर्त्तव्य, नीति निर्देशक सिद्धांत; संसदीय प्रणाली एवं संशोधन प्रक्रिया; न्यायिक पुनरावलोकन एवं मूल संरचना सिद्धांत
4प्रधान अंग — (क) संघ सरकार: कार्यपालिका, विधायिका एवं सर्वोच्च न्यायालय की विचारित भूमिका एवं वास्तविक कार्यप्रणाली; (ख) राज्य सरकार: कार्यपालिका, विधायिका एवं उच्च न्यायालयों की विचारित भूमिका एवं वास्तविक कार्यप्रणाली
5आधारिक (Grassroots) लोकतंत्र: पंचायती राज एवं नगर शासन; 73वें एवं 74वें संशोधनों का महत्व; आधारिक आंदोलन
6सांविधिक संस्थाएँ/आयोग: निर्वाचन आयोग, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, वित्त आयोग, संघ लोक सेवा आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, राष्ट्रीय महिला आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग
7संघ राज्य पद्धति (Federalism): सांविधानिक उपबंध; केंद्र-राज्य संबंधों का बदलता स्वरूप; एकीकरणवादी प्रवृत्तियाँ एवं क्षेत्रीय आकांक्षाएँ; अंतर-राज्य विवाद
8योजना एवं आर्थिक विकास: नेहरूवादी एवं गांधीवादी परिप्रेक्ष्य; योजना एवं निजी क्षेत्र की भूमिका; हरित क्रांति, भूमि सुधार एवं कृषि संबंध; उदारीकरण एवं आर्थिक सुधार
9भारतीय राजनीति में जाति, धर्म एवं नृजातीयता (Ethnicity)
10दल प्रणाली: राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय राजनैतिक दल; दलों के वैचारिक एवं सामाजिक आधार; बहुदलीय गठबंधन राजनीति के स्वरूप; दबाव समूह; निर्वाचक आचरण की प्रवृत्तियाँ; विधायकों का बदलता सामाजिक-आर्थिक स्वरूप
11सामाजिक आंदोलन: नागरिक स्वतंत्रताएँ एवं मानवाधिकार आंदोलन; महिला आंदोलन; पर्यावरणवादी आंदोलन

PSIR वैकल्पिक पाठ्यक्रम: प्रश्न पत्र 2

तुलनात्मक राजनीति तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध

खंड-अ: तुलनात्मक राजनैतिक विश्लेषण एवं अंतर्राष्ट्रीय राजनीति

क्र.विषय
1तुलनात्मक राजनीति: स्वरूप एवं प्रमुख उपागम; राजनैतिक अर्थव्यवस्था एवं राजनैतिक समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य; तुलनात्मक प्रक्रिया की सीमाएँ
2तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य में राज्य: पूंजीवादी एवं समाजवादी अर्थव्यवस्थाओं तथा उन्नत औद्योगिक एवं विकासशील समाजों में राज्य के बदलते स्वरूप एवं विशेषताएँ
3राजनैतिक प्रतिनिधान एवं सहभागिता: उन्नत औद्योगिक एवं विकासशील समाजों में राजनैतिक दल, दबाव समूह एवं सामाजिक आंदोलन
4भूमंडलीकरण: विकसित एवं विकासशील समाजों से प्राप्त अनुक्रियाएँ (Responses)
5अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के अध्ययन के उपागम: आदर्शवादी, यथार्थवादी, मार्क्सवादी, प्रकार्यवादी एवं प्रणाली सिद्धांत
6अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में आधारभूत संकल्पनाएँ: राष्ट्रीय हित, सुरक्षा एवं शक्ति; शक्ति संतुलन एवं प्रतिरोध (Deterrence); पारराष्ट्रीय कर्ता एवं सामूहिक सुरक्षा; विश्व पूंजीवादी अर्थव्यवस्था एवं भूमंडलीकरण
7बदलती अंतर्राष्ट्रीय राजनैतिक व्यवस्था — (क) महाशक्तियों का उदय; कार्यनीतिक एवं वैचारिक द्विधुर्वीयता, शस्त्रीकरण की होड़ एवं शीत युद्ध; नाभिकीय खतरा; (ख) गुट निरपेक्ष आंदोलन: लक्ष्य एवं उपलब्धियाँ; (ग) सोवियत संघ का विघटन; एकध्रुवीयता एवं अमेरिकी वर्चस्व; समकालीन विश्व में गुट-निरपेक्षता की प्रासंगिकता
8अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था का उद्भव: ब्रेटन वुड्स से विश्व व्यापार संगठन तक; समाजवादी अर्थव्यवस्थाएँ तथा पारस्परिक आर्थिक सहायता परिषद (CMEA); नव अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था की तृतीय विश्व की माँग; विश्व अर्थव्यवस्था का भूमंडलीकरण
9संयुक्त राष्ट्र: विचारित भूमिका एवं वास्तविक लेखा-जोखा; विशेषीकृत संयुक्त राष्ट्र अभिकरण — लक्ष्य एवं कार्यकरण; संयुक्त राष्ट्र सुधारों की आवश्यकता
10विश्व राजनीति का क्षेत्रीकरण (Regionalisation): EU, ASEAN, APEC, SAARC, NAFTA
11समकालीन वैश्विक सरोकार: लोकतंत्र, मानवाधिकार, पर्यावरण, लिंग न्याय, आतंकवाद, नाभिकीय प्रसार

खंड-ब: भारत तथा विश्व

क्र.विषय
1भारत की विदेश नीति: विदेश नीति के निर्धारक; नीति निर्माण की संस्थाएँ; निरंतरता एवं परिवर्तन
2गुट निरपेक्षता आंदोलन को भारत का योगदान: विभिन्न चरण; वर्तमान भूमिका
3भारत और दक्षिण एशिया — (क) क्षेत्रीय सहयोग: SAARC का पिछला निष्पादन एवं भावी प्रत्याशाएँ; (ख) दक्षिण एशिया मुक्त व्यापार क्षेत्र के रूप में; (ग) भारत की “पूर्व की ओर देखो” (Look East) नीति; (घ) क्षेत्रीय सहयोग की बाधाएँ: नदी जल विवाद, अवैध सीमा-पार उत्प्रवासन, नृजातीय द्वंद्व एवं उपप्लव, सीमा विवाद
4भारत एवं वैश्विक दक्षिण (Global South): अफ्रीका एवं लातिनी अमेरिका के साथ संबंध; NIEO एवं WTO वार्ताओं में नेतृत्व की भूमिका की माँग
5भारत एवं वैश्विक शक्ति केंद्र: संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ (EU), जापान, चीन एवं रूस
6भारत एवं संयुक्त राष्ट्र प्रणाली: संयुक्त राष्ट्र शांति-अनुरक्षण में भूमिका; सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की माँग
7भारत एवं नाभिकीय प्रश्न: बदलते प्रत्यक्षण एवं नीति
8भारतीय विदेश नीति में हाल के विकास: अफगानिस्तान, इराक एवं पश्चिम एशिया के हाल के संकटों पर भारत की स्थिति; अमेरिका एवं इज़राइल के साथ बढ़ते संबंध; नई विश्व व्यवस्था की दृष्टि